पंडित कमलेश शर्मा जी के बारे में
संघर्ष, सेवा, साधना और वैदिक ज्ञान की प्रेरणादायक यात्रा
प्रारंभिक जीवन
29 मार्च 1972 को भेरूंदा, मध्यप्रदेश में जन्मे पंडित कमलेश शर्मा जी का जीवन संघर्ष, सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना की एक प्रेरणादायक मिसाल है। परिवार में दो बड़ी बहनें, एक बड़े भाई और माता-पिता के साथ उनका बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिताजी पान की दुकान चलाते थे, लेकिन समय के साथ आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई, जिससे परिवार की अधिकांश जिम्मेदारी दोनों भाइयों पर आ गई।
बड़े भाई किराने की दुकान पर मात्र 300 रुपये प्रतिमाह के वेतन पर कार्य करते थे, जबकि पंडित कमलेश शर्मा जी भी छोटी आयु में 150 रुपये प्रतिमाह पर कार्य कर परिवार की सहायता करते थे। चौथी कक्षा से ही उन्होंने गाय चराना, कुएँ पर पशुओं को पानी पिलाना तथा कठिन परिश्रम करना प्रारम्भ कर दिया था। इन्हीं संघर्षों ने उन्हें आत्मनिर्भर, कर्मठ और धैर्यवान बनाया।
सेवा और संस्कारों की नींव
पंडित जी के दादाजी प्रत्येक गुरुवार स्थानीय हाट-बाज़ार में आने वाले लोगों को निःशुल्क जल सेवा प्रदान करते थे। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर पंडित कमलेश शर्मा जी भी बाजार में काम करने वाले मजदूरों, किसानों और राहगीरों को प्रेमपूर्वक पानी पिलाते थे। लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार कभी 5 रुपये तो कभी 10 पैसे भेंटस्वरूप दे देते थे, लेकिन सेवा का उद्देश्य सदैव मानवता और पुण्य रहा।
दादाजी का जीवन अत्यंत सादा और धार्मिक था। उनके संस्कारों ने पंडित जी के भीतर सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता के बीज बचपन से ही बो दिए।
गुरुकुल जीवन की शुरुआत
वर्ष 1984 में पाँचवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनके दादाजी ने उनका प्रवेश महर्षि महेश योगी गुरुकुल, होलीपुरा (बुदनी, मध्यप्रदेश) में कराया। यह गुरुकुल पूर्णतः निःशुल्क वैदिक शिक्षा एवं संस्कार प्रदान करने वाला संस्थान था।
यहीं से पंडित कमलेश शर्मा जी ने वेद, आयुर्वेद, योग, ध्यान, संस्कृत, संध्या-वंदन तथा सनातन धर्म के सिद्धांतों का गहन अध्ययन प्रारम्भ किया।
गुरुकुल की अनुशासित दिनचर्या
गुरुकुल का जीवन तपस्या के समान था।
प्रातः 5:00 बजे घंटी के साथ जागरण।
नित्यकर्म के पश्चात प्रातः स्मरण एवं संध्या-वंदन।
योग एवं प्राणायाम।
वैदिक शिक्षा एवं आयुर्वेद का अध्ययन।
त्रिकाल संध्या एवं सात्त्विक भोजन।
दोपहर एवं सायंकाल पुनः वैदिक अध्ययन।
खेलकूद (फुटबॉल, हॉकी आदि) द्वारा शारीरिक विकास।
संध्या आरती, ध्यान एवं रात्रि स्वाध्याय।
रात्रि 10 बजे विश्राम।
गुरुकुल में प्रत्येक विद्यार्थी अपना कार्य स्वयं करता था। कपड़े धोना, भोजन की थाली साफ करना, स्वच्छता बनाए रखना तथा आत्मनिर्भर बनना शिक्षा का अनिवार्य भाग था।
कठोर अनुशासन ने गढ़ा व्यक्तित्व
गुरुजनों का अनुशासन अत्यंत कठोर था। नियमों का पालन न करने पर दंड मिलता था तथा गंभीर स्थिति में विद्यार्थियों को गुरुकुल से निष्कासित भी कर दिया जाता था। घर की याद आने पर भी विद्यार्थी खुलकर रो नहीं सकते थे। यदि कोई रोता हुआ दिखाई देता, तो उसे भी दंड मिलता था।
यद्यपि उस समय यह अनुशासन कठिन प्रतीत होता था, लेकिन आगे चलकर यही शिक्षा उनके जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बनी।
लगभग 2000 विद्यार्थियों ने एक साथ प्रवेश लिया था, किंतु कठोर नियमों और कठिन साधना के कारण अंत तक केवल 130 विद्यार्थी ही अपनी शिक्षा पूर्ण कर सके। पंडित कमलेश शर्मा जी उन चुनिंदा विद्यार्थियों में शामिल रहे जिन्होंने धैर्य, परिश्रम और गुरु-आज्ञा का पालन करते हुए सफलता प्राप्त की।
दिल्ली में उच्च वैदिक शिक्षा
गुरुकुल की शिक्षा पूर्ण करने के बाद पंडित कमलेश शर्मा जी वर्ष 1987 में मात्र 12 वर्ष की आयु में महर्षि महेश योगी आश्रम, नई दिल्ली पहुँचे। यहाँ उन्होंने लगभग चार वर्षों तक उच्च स्तर की वैदिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की।
दिल्ली में उन्होंने वैदिक ज्योतिष, वेद, पुराण, कर्मकाण्ड, संस्कृत व्याकरण, श्रीमद्भागवत एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया।
इस दौरान उन्हें आचार्य रमणानंद मिश्र जी तथा आचार्य भारतलाल जी जैसे विद्वान गुरुजनों का सान्निध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। दिल्ली आश्रम में भी वही कठोर अनुशासन, योग, साधना और वैदिक परंपरा का पालन कराया जाता था, जिसने उनके ज्ञान और व्यक्तित्व को और अधिक समृद्ध बनाया।
काशी (वाराणसी) में अध्ययन
दिल्ली में चार वर्षों की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात पंडित कमलेश शर्मा जी ने वाराणसी (काशी) में लगभग दो वर्षों तक उच्च वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन किया।
काशी की आध्यात्मिक परंपरा और विद्वान आचार्यों के सान्निध्य में उन्होंने ज्योतिष शास्त्र, कर्मकाण्ड, वेद, पुराण एवं सनातन धर्म का गहन अध्ययन कर अपने ज्ञान को और अधिक व्यापक बनाया।
आज का उद्देश्य
वर्षों की साधना, वैदिक शिक्षा और आध्यात्मिक अनुभव के आधार पर आज पंडित कमलेश शर्मा जी हजारों लोगों को सही मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
वे केवल भविष्य बताने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति और वैदिक सिद्धांतों के आधार पर जीवन की समस्याओं का समाधान एवं सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
उनकी प्रमुख सेवाएँ हैं—
जन्म कुंडली विश्लेषण
कुंडली मिलान
विवाह एवं वैवाहिक परामर्श
प्रेम संबंध समाधान
करियर एवं व्यवसाय मार्गदर्शन
वास्तु परामर्श
ग्रह दोष निवारण
रत्न परामर्श
पूजा एवं वैदिक अनुष्ठान
आध्यात्मिक एवं जीवन मार्गदर्शन
हमारा विश्वास
“संघर्ष ने धैर्य सिखाया, सेवा ने विनम्रता दी, गुरुजनों ने अनुशासन दिया और वैदिक ज्ञान ने जीवन का उद्देश्य। इन्हीं मूल्यों के साथ पंडित कमलेश शर्मा जी आज भी निःस्वार्थ भाव से समाज की सेवा कर रहे हैं और वैदिक ज्योतिष के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सतत प्रयास कर रहे हैं।”